मनुष्य को अपने साथी मनुष्यों की भविष्यवाणियों को पूरा न करने की लाइलाज आदत है।
(Man has an incurable habit of not fulfilling the prophecies of his fellow men.)
यह उद्धरण मानव स्वभाव में दूसरों द्वारा की गई भविष्यवाणियों और भविष्यवाणियों की अवहेलना या खारिज करने की आवर्ती प्रवृत्ति पर प्रकाश डालता है। यह एक प्रकार के जन्मजात संदेह या शायद अति आत्मविश्वास का संकेत देता है जो हमें संभावित दूरदर्शिता को नजरअंदाज करने के लिए प्रेरित करता है, चाहे वह बेहतर हो या बुरा। ऐसा व्यवहार प्रगति में बाधा बन सकता है, क्योंकि लोग बाहरी भविष्यवाणियों के आधार पर भविष्य की चुनौतियों या अवसरों को कम आंक सकते हैं। इसके विपरीत, यह अंतर्दृष्टि पर भरोसा करने और दूसरों से मार्गदर्शन के लिए खुले रहने के महत्व को भी रेखांकित करता है, भले ही पिछले अनुभवों से निराशा हुई हो। इस आदत को पहचानने से हमें संदेह को खुलेपन के साथ संतुलित करने, व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों संदर्भों में विकास और समझ को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
---एलिस्टेयर कुक---