इन दिनों गाना कई लोगों के लिए एक यांत्रिक अभ्यास बन गया है, और ज्यादातर ऐसा इसलिए है क्योंकि गाने की ऐसी स्थितियाँ जिनमें दिल से प्रयास की आवश्यकता होती है, दुर्लभ हैं।

इन दिनों गाना कई लोगों के लिए एक यांत्रिक अभ्यास बन गया है, और ज्यादातर ऐसा इसलिए है क्योंकि गाने की ऐसी स्थितियाँ जिनमें दिल से प्रयास की आवश्यकता होती है, दुर्लभ हैं।


(Singing these days has become a mechanical exercise for many, and mostly this is because song situations that require effort from the heart are rare to come by.)

📖 M. Jayachandran


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आज के संगीत परिदृश्य में, कई कलाकार वास्तविक भावना के बजाय आदत के कारण प्रदर्शन कर सकते हैं। यह उद्धरण हमें कला में हार्दिक अभिव्यक्ति के महत्व की याद दिलाता है, यह सुझाव देता है कि सच्चे गायन में भावनात्मक प्रयास और प्रामाणिकता शामिल है। जब संगीत सिर्फ एक दिनचर्या बन जाता है, तो यह कलाकार और दर्शक दोनों के साथ अपनी गहराई और जुड़ाव खो देता है। ईमानदारी को बहाल करने के लिए, संगीतकारों को ऐसे क्षणों की तलाश करनी चाहिए या बनाना चाहिए जो उन्हें भावनात्मक रूप से चुनौती दें, वास्तविक जुड़ाव को बढ़ावा दें और साथ ही श्रोताओं को प्रेरित करें। अंततः, संगीत तब फलता-फूलता है जब यह यांत्रिक दोहराव के बजाय प्रामाणिक मानवीय अनुभवों को प्रतिबिंबित करता है।

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अद्यतन
जनवरी 05, 2026

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