मध्यवर्गीय माता-पिता की आने वाली पीढ़ियाँ अपने बच्चों पर अपनी पसंदीदा किताबें थोपती थीं। लेकिन अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में कुछ समय के लिए यह कम होने लगा - इसलिए नहीं कि बच्चों ने मनमोहक जानवरों में रुचि खो दी थी, बल्कि इसलिए कि उनमें से अधिकांश उपयोगी, शांतिदायक वीडियो पर उपलब्ध थे।
(Successive generations of middle-class parents used to foist their own favourite books on their children. But some time in the late Eighties it began to wane - not because children had lost interest in adorable animals but because most of it was available on useful, pacifying video.)
यह उद्धरण समय के साथ माता-पिता के प्रभाव और बच्चों की रुचियों में बदलाव को दर्शाता है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे पोषित पुस्तकों को वितरित करने की पारंपरिक पद्धति को डिजिटल सामग्री, विशेष रूप से वीडियो द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है, जो आधुनिक बच्चों के लिए अधिक सुलभ और शायद अधिक आकर्षक हैं। यह सांस्कृतिक प्रसारण और अवकाश गतिविधियों पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव को रेखांकित करता है, यह सुझाव देता है कि विकल्प न केवल बच्चों की प्राथमिकताओं से बल्कि सुविधाजनक प्रारूपों में सामग्री की उपलब्धता से भी संचालित होते हैं। यह परिवर्तन बचपन के अनुभवों और पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान और मनोरंजन के उपभोग के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।