जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं आप सीखते हैं कि एक व्यक्ति के रूप में आपको क्या चाहिए।
(You learn as you get older what you need as an individual.)
जैसे-जैसे हम जीवन से गुजरते हैं, स्वयं के बारे में हमारी समझ गहरी होती जाती है। अनुभव हमें सामाजिक अपेक्षाओं से परे हमारी वास्तविक ज़रूरतों - भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक - को पहचानना सिखाता है। आत्म-खोज की यह यात्रा हमें उस चीज़ को प्राथमिकता देने की अनुमति देती है जो वास्तव में हमें संतुष्ट करती है, विकास और प्रामाणिकता को बढ़ावा देती है। इस चल रही सीखने की प्रक्रिया को अपनाने से अधिक संतोषजनक और संतुलित जीवन जीया जा सकता है, जो हमें याद दिलाता है कि परिपक्वता में सिर्फ उम्र बढ़ना ही शामिल नहीं है बल्कि खुद को अधिक स्पष्ट रूप से समझना भी शामिल है।