एक घटना जिसने मुझ पर प्रभाव छोड़ा वह 1999 में कलकत्ता में आयोजित सब-जूनियर राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिप थी। मैंने वहां तक ​​पहुंचने के लिए बहुत कड़ी ट्रेनिंग की थी लेकिन पहले ही राउंड में बाहर हो गया। 'अगर दूसरे जीत सकते हैं तो आप क्यों नहीं?' मैंने खुद से बार-बार पूछा.

एक घटना जिसने मुझ पर प्रभाव छोड़ा वह 1999 में कलकत्ता में आयोजित सब-जूनियर राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिप थी। मैंने वहां तक ​​पहुंचने के लिए बहुत कड़ी ट्रेनिंग की थी लेकिन पहले ही राउंड में बाहर हो गया। 'अगर दूसरे जीत सकते हैं तो आप क्यों नहीं?' मैंने खुद से बार-बार पूछा.


(An incident that left an impression on me was the 1999 sub-junior national boxing championship held in Calcutta. I had trained extremely hard to get there but got kicked out in the first round itself. 'If others can win, why can't you?' I repeatedly asked myself.)

📖 Vijender Singh


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यह उद्धरण असफलताओं के सामने लचीलेपन और आत्म-प्रेरणा के महत्व पर प्रकाश डालता है। प्रतियोगिता से जल्दी बाहर निकलने की निराशा के बावजूद, आंतरिक संवाद दृढ़ता और इस विश्वास पर जोर देता है कि दृढ़ संकल्प के माध्यम से सफलता प्राप्त की जा सकती है। ऐसे क्षण, दर्दनाक होते हुए भी, महत्वपूर्ण सीखने के अनुभव के रूप में काम करते हैं, भविष्य के प्रयासों और विकास को बढ़ावा देते हैं। असफलता को असफलता की बजाय सीढ़ी के रूप में अपनाने से किसी भी लक्ष्य में मानसिक शक्ति और लचीलेपन को बढ़ावा मिलता है। मुख्य संदेश यह है कि दृढ़ता और सकारात्मक मानसिकता निराशाओं को भविष्य की सफलता के लिए प्रेरणा में बदल सकती है।

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जनवरी 04, 2026

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