क्या मुझे ठीक से याद है कि मैंने अपने पति को कब 'खोया' था? क्या यही वह क्षण था जब मुझे उसके जूते के फीते बाँधने शुरू करने पड़े? या जब हमने एक-दूसरे के साथ हंसना बंद कर दिया? पीछे मुड़कर देखें तो उस मोड़ को इंगित करना असंभव है। लेकिन फिर, यह मनोभ्रंश की प्रकृति है।

क्या मुझे ठीक से याद है कि मैंने अपने पति को कब 'खोया' था? क्या यही वह क्षण था जब मुझे उसके जूते के फीते बाँधने शुरू करने पड़े? या जब हमने एक-दूसरे के साथ हंसना बंद कर दिया? पीछे मुड़कर देखें तो उस मोड़ को इंगित करना असंभव है। लेकिन फिर, यह मनोभ्रंश की प्रकृति है।


(Can I remember exactly when I 'lost' my husband? Was it the moment when I had to start tying his shoelaces for him? Or when we stopped being able to laugh with each other? Looking back, that turning point is impossible to pinpoint. But then, that's the nature of dementia.)

📖 Judy Parfitt


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यह मार्मिक प्रतिबिंब इस बात पर प्रकाश डालता है कि मनोभ्रंश कितना विनाशकारी और घातक हो सकता है। यह नुकसान की धारणा को सूक्ष्मता से बदल देता है - एक विशिष्ट क्षण से चल रही प्रक्रिया में जो साझा यादों और कनेक्शनों को मिटा देता है। भावनात्मक प्रभाव बहुत अधिक है, इस बात पर जोर देते हुए कि गिरावट सिर्फ जैविक नहीं है बल्कि रिश्तों के ताने-बाने को गहराई से प्रभावित करती है। 'टर्निंग पॉइंट' की अस्पष्टता मनोभ्रंश के प्रभाव की अप्रत्याशित और निरंतर प्रकृति को रेखांकित करती है, जो हमें प्रभावित लोगों और उनके प्रियजनों के लिए करुणा और समझ के महत्व की याद दिलाती है।

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जनवरी 16, 2026

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