मैं जीवन कहलाने वाली हर चीज़ के प्रति श्रद्धावान होने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता। मैं उस सब के प्रति दया रखने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता जिसे जीवन कहा जाता है। यही समस्त नैतिकता की शुरुआत और नींव है।

मैं जीवन कहलाने वाली हर चीज़ के प्रति श्रद्धावान होने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता। मैं उस सब के प्रति दया रखने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता जिसे जीवन कहा जाता है। यही समस्त नैतिकता की शुरुआत और नींव है।


(I can do no other than be reverent before everything that is called life. I can do no other than to have compassion for all that is called life. That is the beginning and the foundation of all ethics.)

📖 Albert Schweitzer


🎂 January 14, 1875  –  ⚰️ September 4, 1965
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यह उद्धरण गहरे सम्मान और करुणा का प्रतीक है जो एक वास्तविक नैतिक विश्वदृष्टि को रेखांकित करता है। यह इस बात पर जोर देता है कि जीवन के प्रति श्रद्धा नैतिक व्यवहार का मूल है, और हमें सभी जीवित प्राणियों के साथ दयालुता और सम्मान के साथ व्यवहार करने का आग्रह करता है। जीवन के अंतर्संबंध को पहचानने से हमारे कार्यों में विनम्रता, सहानुभूति और जिम्मेदारी को बढ़ावा मिलता है। नैतिकता को करुणा पर आधारित करके, यह हमें हमारे आस-पास की दुनिया के साथ अधिक देखभाल और विचारशील बातचीत की ओर निर्देशित करता है - हमें याद दिलाता है कि नैतिकता जीवन के सभी रूपों के प्रति श्रद्धा और प्रेम की हमारी क्षमता में निहित है।

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जनवरी 07, 2026

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