इतिहास पढ़ने पर वैज्ञानिक विकास के वास्तविक स्वरूप का अहसास कम ही होता है, जिसमें प्रहसन का तत्व विजय के तत्व जितना ही महान है।

इतिहास पढ़ने पर वैज्ञानिक विकास के वास्तविक स्वरूप का अहसास कम ही होता है, जिसमें प्रहसन का तत्व विजय के तत्व जितना ही महान है।


(Reading history, one rarely gets the feeling of the true nature of scientific development, in which the element of farce is as great as the element of triumph.)

📖 David Gross


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यह उद्धरण वैज्ञानिक प्रगति के अक्सर उपेक्षित हास्यप्रद और अप्रत्याशित पक्ष पर प्रकाश डालता है। यह हमें याद दिलाता है कि वैज्ञानिक सफलताएँ हमेशा सीधे या विशुद्ध रूप से महान प्रयास नहीं होती हैं; उनमें गलतियाँ, गलत कदम और मनोरंजक दुस्साहस शामिल हो सकते हैं। इस सूक्ष्म वास्तविकता को पहचानने से वैज्ञानिकों के प्रति अधिक मानवीय दृष्टिकोण और खोज की पुनरावृत्ति प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। विजय के साथ-साथ प्रहसन के तत्व को अपनाने से वैज्ञानिक गतिविधियों में विनम्रता और लचीलेपन को बढ़ावा मिलता है, यह स्वीकार करते हुए कि असफलताएँ और त्रुटियाँ सच्ची प्रगति के अभिन्न अंग हैं। यह इतिहास में अक्सर प्रस्तुत की जाने वाली पॉलिश कथाओं से परे, वैज्ञानिक यात्रा की एक समृद्ध, अधिक प्रामाणिक सराहना भी प्रदान करता है।

---डेविड ग्रॉस---

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अद्यतन
जनवरी 11, 2026

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