एक हताशा यह भी है कि ऐसे क्षणों में जब तख्तापलट नहीं होता है, जब सड़कों पर लोग नहीं होते हैं, तो देश लोगों की चेतना से गायब हो जाता है।

एक हताशा यह भी है कि ऐसे क्षणों में जब तख्तापलट नहीं होता है, जब सड़कों पर लोग नहीं होते हैं, तो देश लोगों की चेतना से गायब हो जाता है।


(There is a frustration too, that at moments when there's not a coup, when there are not people in the streets, that the country disappears from people's consciousness.)

📖 Edwidge Danticat

 |  👨‍💼 लेखक

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यह उद्धरण राजनीतिक जागरूकता और जुड़ाव के विरोधाभास पर प्रकाश डालता है। इससे पता चलता है कि किसी देश का महत्व अक्सर उथल-पुथल या विरोध के क्षणों में ही स्पष्ट होता है। शांत समय के दौरान, देश सामूहिक चेतना से लुप्त हो जाता है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर निरंतर ध्यान देने की चिंता पैदा होती है। ऐसा चक्र सार्थक दीर्घकालिक प्रगति में बाधा बन सकता है, क्योंकि नागरिक केवल तभी ध्यान दे सकते हैं जब संकट उत्पन्न होता है, और निरंतर नागरिक सहभागिता और जागरूकता के महत्व की उपेक्षा करते हैं।

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अद्यतन
जनवरी 14, 2026

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